India Japan Kaizen

हमारी विरासत

बारह सदियों पुरानी एक दोस्ती

पहले दफ़्तर या कारखाने से बहुत पहले, भारत और जापान साथ मिलकर कुछ न कुछ रच रहे थे। इस पुल को गढ़ने वाले कुछ पल।

  1. 752

    एक भारतीय भिक्षु महान बुद्ध की आँखें खोलता है

    भारत के भिक्षु बोधिसेन को नारा बुलाया गया ताकि वे तोदाई-जी के महान बुद्ध का नेत्र-उद्घाटन अनुष्ठान करें — वही संस्कार जिसने प्रतिमा में प्राण फूँके। तभी से हमारी संस्कृतियाँ पवित्रता को साझा करती आई हैं।

  2. 1916

    टैगोर को जापान में एक आत्मीय मित्र मिलता है

    कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने जापान की कला और शांत अनुशासन से आकर्षित होकर पहली बार (और बाद में कई बार) जापान की यात्रा की, और जापानी कलाकारों व विचारकों से स्थायी मित्रता बनाई।

  3. 1949

    इंदिरा नाम का एक हाथी

    जब युद्ध से थके टोक्यो के बच्चों के पास देखने को कोई हाथी नहीं था, तो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें एक हाथी भेजा और उसका नाम रखा इंदिरा। एक पूरी पीढ़ी समंदर पार से आए उस तोहफ़े से प्यार करते हुए बड़ी हुई।

  4. 1980 के दशक — आज

    काइज़ेन समंदर पार करता है

    जापानी कारीगरी और काइज़ेन का अनुशासन भारत के कारखानों तक पहुँचा — मारुति सुज़ुकी की पहली कारों से लेकर दिल्ली मेट्रो तक — जबकि भारतीय प्रतिभा और विचार जापान लौटते रहे। सुधार एक साझा भाषा बन गया।

India Japan Kaizen बस अगला अध्याय है — इस दोस्ती को आगे ले जाता हुआ, एक इंसान, एक क्लब, एक छोटे कदम के साथ।
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